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उज्जायी प्राणायाम के 17 फायदे और नुकसान,उज्जायी प्राणायाम करने की सही विधि:

 हमे स्वस्थ और निरोगी जीवन व्यापन करने के लिए स्वस्थ खानपान के साथ योगाभ्यास करना जरूरी है, क्योंकि अच्छे जीवनशैली के साथ नियमित रूप से योगाभ्यास करने से व्यक्ति शारीरिक और मानसिक दोनो रूप से स्वस्थ रह सकता हैं, आज हम इस लेख में उज्जायी प्राणायाम कैसे करे, उज्जायी प्राणायाम के फायदे, उज्जयी प्राणायाम के नुकसान आदि के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, इस प्राणायाम को करना बिल्कुल ही आसान और स्वास्थ की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी है, योग एक्सपर्ट की माने तो इस प्राणायाम को हर उम्र के व्यक्ति नियमित रूप से कर सकते है,इस प्राणायाम को सही तरीके से करने से  संपूर्ण शरीर को कई प्रकार के लाभ मिल सकते हैं, मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को आराम देने के साथ मानसिक स्वास्थ्य विकारों के जोखिम को कम करने और शरीर को स्वस्थ रखने में इसके अभ्यास से फायदा पाया जा सकता है।



उज्जायी प्राणायाम के 17 फायदे और नुकसान,उज्जायी प्राणायाम करने की सही विधि:

उज्जायी प्राणायाम क्या है (what is ujjayi pranayama in Hindi):

इस प्राणायाम के अभ्यास से वायु को जीता जा सकता  है,उज्जायी प्राणायाम संस्कृत के शब्द (उद्+जायी) से मिलकर बना है,जिसका मतलब होता है" विजय पाना" इस प्राणायाम का नाम उज्जायी इसलिए पड़ा क्योंकि इस प्राणायाम में श्वास के दौरान पेट और छाती का विस्तार किसी के आत्मविश्वास को इस तरह से बढ़ाता है जो एक विजयी योद्धा की याद दिलाता है। इस प्राणायाम को ओसियन ब्रीदिंग के नाम से भी जाना जाता है। जब इस प्राणायाम को किया जाता है तो शरीर में गर्म वायु प्रवेश करती है और दूषित वायु निकलती है. उज्जायी प्राणायाम को करते समय समुद्र के समान ध्वनि आती है इसलिए इसे ओसियन ब्रीथ के नाम से जाना जाता हैं,यह प्राणायाम मन को शांत करने और तीनों दोषों को संतुलित करने वाला माना जाता है।इस प्राणायाम को अंग्रेजी में विक्टोरियस ब्रेथ कहा जाता हैं

उज्जायी प्राणायाम कैसे करें (How to do Ujjayi Pranayama in Hindi):

उज्जायी प्राणायाम को अगर सही तरीके से ना किया जाए तो इस प्राणायाम का लाभ मिलना मुश्किल है तो ऐसे में इस प्राणायाम का लाभ पाने के लिए प्राणायाम को सही तरीके से करना बहुत जरूरी है, उज्जायी प्राणायाम को करने के तीन तरीके होते हैं,खड़े होकर,बैठकर,लेटकर,

प्रथम विधि:

खड़े होकर उज्जायी प्राणायाम कैसे करें:

अगर आप बैठने में असहज महसूस करते है,या फिर बैठकर इस प्राणायाम को करने में सक्षम नहीं हैं तो ऐसे में आप इस प्राणायाम को खड़े होकर भी कर सकते हैं।

  • इस प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले सावधान कि मुद्रा में खड़े हो जाए, इस मुद्रा में एड़ी मिली हुई हो और दोनों पंजे फैले हुए हों।
  • अब अपनी जीभ को गोलाकार के रूप में बनाकर होटों के बीच से थोड़ा सा बाहर निकालें।
  • अब इस बाहर निकली हुई जीभ से अन्दर की वायु को धीरे–धीरे करके बाहर निकालें।
  • अब अपनी दोनों नाक की छिद्र से धीरे- धीरे और गहरी स्वास अंदर की ओर लें और को जितना हो सके इतनी देर तक स्वास को अंदर की ओर रोक कर रखे।
  • अब स्वास को धीरे -धीरे करके बाहर की ओर निकाल दें,और शरीर को ढीला कर दे।
  • ऐसे ही इस प्रक्रिया को छ से सात बार तक करे।
  • इस प्राणायाम का अभ्यास आप 24 घंटे में केवल एक बार ही करें।

दूसरी विधि:

बैठकर कैसे करे उज्जायी प्राणायाम:

अगर आप बैठकर इस प्राणायाम को कर सकते हैं,तो इस प्राणायाम को कर सकते हैं,बैठकर इस प्राणायाम को करने की निम्न विधि नीचे बताई गई हैं।

  • इस प्राणायाम को करने के लिए शांत और हवादार माहौल का चुनाव करे।
  • अब योग मैट पर पदमासन या सुखासन की मुद्रा में बैठ जाए, और मुंह को बंद रखें।
  • अब आप दोनों नाको  की छिद्र से धीरे-धीरे   श्वास अंदर की ओर तब तक लें जब तक श्वास से आपका फेफड़ा पूरी तरह से भर ना  जाए।
  • ध्यान रहे जब आप दोनों नाकों के छिद्र से सांस अंदर की और लें तो ऐसे में आप गर्दन के थाइराइड वाले हिस्से को कंपन कराके ऊं की ध्वनि उत्पन्न करने की कोशिश करें। ये ध्वनि हल्की और समान होनी चाहिए।
  • अब श्वास को अपनी क्षमता के अनुसार अंदर रोक कर रखे।
  • अब अपने दाहिने अंगूठे से दाए नाक के छिद्र को बंद कर बायीं नाक के छिद्र से धीरे-धीरे श्वास बाहर की ओर छोड़ें।
  • इस तरह से इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ, इस तरह से आप इस प्राणायाम को 10 से 12 चक्र कर सकते है।
तीसरी विधि:


लेटकर कैसे करें उज्जायी प्राणायाम:

अगर आप इस प्राणायाम को बैठकर या खड़े होकर करने में असमर्थ है, यानी की अगर आपके कमर या जोड़ों में दर्द है तो ऐसे में आप इस प्राणायाम को लेटकर भी कर सकते हैं।

  • इस प्राणायाम को करने के लिए शांत और हवादार माहौल का चुनाव करे।
  • सबसे पहले किसी समतल जमीन पर योग मैट पर सीधे लेट जाए और अपने दोनों पैरों और हांथ दोनो को सटाकर रखें । उसके बाद अपने पूरे शरीर को ढीला, और अपने मन को शांत रखे।
  • अब अपने दोनो नाकों से धीरे–धीरे लम्बी व गहरी श्वास अंदर की ओर लें,और इन अपने फेफड़ो को फुलाए। अब श्वास को जितना हो सके अपनी क्षमता के अनुसार इतनी देर तक अपने अंदर की ओर रोक कर रखें।
  • फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ कर श्वास को धीरे -धीरे समान मात्रा में बहार की और निकाल दें।
  • इस तरह इस प्राणायाम का एक चक्र पूरा हुआ,इस प्राणायाम को आप कम से कम छह से सात बार दोहरा सकते हैं और धीरे धीरे समय बीतने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार इस प्राणायाम के समय को बढ़ा सकते हैं।

उज्जायी प्राणायाम के फायदे (Benefits of Ujjayi Pranayama in Hindi):

उज्जायी प्राणायाम एक श्वास तकनीक है जो आमतौर पर योग में प्रयोग की जाती है। इसे "समुद्री सांस" के रूप में भी जाना जाता है और इसमें गले के पीछे की मांसपेशियों को धीरे से संकुचित करते हुए नासिका से श्वास लेना और छोड़ना शामिल है। योग अभ्यास के दौरान दिमाग को शांत करने और फोकस में सुधार करने में मदद के लिए प्रयोग की जाती है। इसके मानसिक लाभों के अलावा, उज्जयी प्राणायाम कई शारीरिक लाभ प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:


1. अस्थमा की समस्या के लिए:

अस्थमा स्वसन तंत्र से संबंधित बीमारी है,जिसमे रोगी को सांस लेने में दिक्कत होती है,योग एक्सपर्ट की माने तो अगर आप नियमित रूप से उज्जयी प्राणायाम को रोज सुबह खाली पेट करे तो ये स्वसन प्रणाली से संबंधी सभी बीमारियो जैसे–अस्थमा,एलर्जी,सर्दी,खांसी, बलगम आदि की समस्याओं के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं।

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 2. शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम:

उज्जयी प्राणायाम के अभ्यास से शरीर के ताप को भी नियंत्रित किया जा सकता हैं, क्योंकि इस आसन को करते वक्त योगी को गहरी सांस लेने की जरूरत पड़ती हैं, जिस कारण से शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, गर्मी और विश्राम की भावना को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।


3. एकाग्रता बढ़ाने में लाभकारी:

उज्जाई प्राणायाम का अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती हैं, क्योंकि इस प्राणायाम का अभ्यास करते वक्त योगी को अपना ध्यान केंद्रित करना पड़ता हैं, जिस वजह से उज्जायी प्राणायाम का रोजाना अभ्यास करने से ध्यान केंद्रित, मन एकाग्र और शान्त बना रहता है।

 


4. वजन कम करने के लिए:

यह प्राणायाम पेट की चर्बी को कम करने में हमारी मदद करता है। बेली फैट या शरीर के अन्य हिस्सों से वसा का एक विशेष रूप से हानिकारक प्रकार है जो आपके अंगों के आसपास जमा होती है।

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5. ब्लड प्रेशर के लिए:

अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के समस्या से जूझ रहे हैं तो ऐसे में आप उज्जायी प्राणायाम को कर सकते है।योग एक्सपर्ट की माने तो इस प्राणायाम को नियमित और सही तरीके से करने से आप हाई ब्लड प्रेसर को कंट्रोल कर सकते है,लेकिन ध्यान रहे इस प्राणायाम को करने के साथ ही आप अपने खानपान को भी संतुलित रखे।


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6. ह्रदय रोगियों के लिए:

अगर आप हृदय से संबंधी कोई भी समस्या से जूझ रहे हैं या फिर आप हृदय रोग से ग्रसित नही है तो भी आप इस प्राणायाम को करने से हृदय से संबंधी कोई भी बीमारी आपको नही हो सकता हैं, योगा एक्सपर्ट की माने तो इस प्राणायाम  के अभ्यास से हम ह्रदय के ज्यादातर सभी रोगों को नष्ट कर सकते हैं, यहाँ कि दिल का दौरा से छुटकारा पा सकते हैं,लेकिन इस प्राणायाम के साथ अपने खान पान और जीवन शैली पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।


7. पाचन क्रिया को ठीक रखने में:

खराब पाचन तंत्र होने पर पेट से संबंधी कई बीमारिया जैसे–पेट में गैस,कब्ज,बवासीर आदि कई गंभीर बीमारियो से ग्रसित हो सकते हैं।योग एक्सपर्ट के अनुसार अगर आप नियमित रूप से प्राणायाम करते है तो इससे आपकी  पाचन क्रिया अच्छी बनी रहती है और यह श्वसन प्रणाली को भी सेहतमंद बनाये रखता है। इसलिए जरूरी है की रोज हेल्थी फ़ूड के साथ थोड़ा सा योगाभ्यास करे।

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8. फेफड़ों को मजबूत बनाने में:
फेफड़े हमारे स्वसन प्रणाली के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है,अगर हमारे फेफड़े सही तरीके से कार्य नही करते है तो हमे सांस से संबंधित कई बीमारी हो सकती हैं,ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए उज्जायी प्राणायाम को बहुत ही कारगर माना जाता है,योग एक्सपर्ट की माने तो इस प्राणायाम को नियमित और सही तरीके से करने सेआपके फेफड़े मजबूत होते हैं,और उनकी प्राणवायु लेने की क्षमता में वृद्धि होती हैं।

फेफडा खराब होने पर व्यक्ति कितने दिनों तक जिंदा रह सकता हैं।

9. खर्राटे की समस्या के लिए:
अक्सर लोग सोने के बाद खर्राटे लेने लगते है,कुछ लोग को खर्राटे इतना तेज आते है जिसके कारण से आस पास के लोगो को सोने में दिक्कत होती है,योग एक्सपर्ट की माने तो जिन लोगों को रात में सोने के बाद खर्राटे की समस्या है, इस प्राणायाम को नियमित रूप से करने से खर्राटे की समस्या दूर हो जाती है।

10. कई वर्षो तक जीवित रहने के लिए:
यह आपकी उम्र को स्वस्थ रूप में बढ़ाने में मदद करती है। शास्त्रों में लिखा गया है के जो मनुष्य नियमित रूप से इस प्राणायाम का अभ्यास करता है उसको मौत भी जल्दी नहीं आती है।
11. चक्कर आने की समस्या के लिए:
कुछ लोगों में चक्कर आने की समस्या रहती है,जिसके कई कारण हो सकते है,योग एक्सपर्ट के अनुसार अगर आप इस प्राणायाम को नियमित रूप से करते है तो इस प्राणायाम से चक्कर आने की समस्या कम होता है।

12. अच्छी नींद लाने के लिए:
इस प्राणायाम को नियमित रूप से करने से मन स्थिर और शांत होता है,योग एक्सपर्ट के अनुसार अगर आपको नींद नहीं आती है तो ऐसे में आप इस प्राणायाम को नियमित रूप से करे,इस प्राणायाम के करने के कुछ ही दिन बाद आपको बहुत ही अच्छी नींद आने लगेगी,अगर आपको नींद ना आए तो नींद ना आने से सोने से पहले इसे करे।  

13. सिर दर्द की समस्या के लिए:
अगर आप बार बार हो रहे सिर दर्द को समस्या से जूझ रहे हैं तो ऐसे में इस प्राणायाम को करना शुरू कर दे,क्योंकि योग एक्सपर्ट बताते है की इस प्राणायाम को नियमित रूप से करने से सिर दर्द, माइग्रेन की समस्या को भी दूर किया जा सकता हैं।

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14. थॉयरॉयड की समस्या के लिए:
इस प्राणायाम को गले की समस्याओं के लिए एक रामबाण औषधि के रूप में माना जाता है इस प्राणायाम को नियमित रूप से करने से थायराइड को नियंत्रित करने में मदद मिलती है,योग एक्सपर्ट के अनुसार इस प्राणायाम से गले की समस्या जैसे गले में खराश, ट्रॉन्सिल आदि की समस्या से निजात पा सकते है।

15. ऑक्सीजन का सेवन बढ़ाता है:
जैसा कि ऊपर लेख में बताया गया हैं कि उज्जाई प्राणायाम के अभ्यास के दौरान हमे गहरी सांस लेने की जरूरत होती है, जिस कारण से ये हमारे ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने में मदद कार्य है, और इसके साथ ही हमारे स्वशन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता हैं।


 16. रक्त परिसंचरण को बढ़ाने में सहायक:
उज्जाई प्राणायाम के रोजाना अभ्यास से हमारे शरीर में ब्लड का संचार सही तरीके से होता है, योग विशेषज्ञ के अनुसार रक्त का परिसंचरण सही तरीके से करने के लिए उज्जाई प्राणायाम का अभ्यास बहुत ही लाभकारी माना जाता हैं, इस आसन के अभ्यास से  गहरी सांस लेने से पूरे शरीर में परिसंचरण और ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

17. तनाव और चिंता कम करता है:
आजकल हर किसी की जिंदगी तनाव और चिंता से भरी हुई है, इस समस्या से निपटने के लिए उज्जयी प्राणायाम को लाभकारी बताया गया है, योग विशेषज्ञ के अनुसार उज्जयी प्राणायाम के दौरान गहरी सांस और ध्यान को केंद्रित करने के कारण तनाव और चिंता की भावनाओं को कम करने में मदद कर सकती है।


 कुल मिलाकर, उज्जायी प्राणायाम एक सरल और शक्तिशाली श्वास तकनीक है जिसका उपयोग शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के स्वास्थ्य में सुधार के लिए किया जा सकता है। यह सभी उम्र के लोगों द्वारा अभ्यास किया जा सकता है।


उज्जायी प्राणायाम करने का सही समय (Right time to do Ujjayi Pranayam in Hindi):-

उज्जायी प्राणायाम या कोई भी प्राणायाम करने का सही समय सुबह का समय माना जाता है,सुबह के समय अगर आप खाली पेट प्राणायाम करते है तो इससे आपको अत्यंत ज्यादा लाभ मिल सकता हैं।


उज्जायी प्राणायाम कितने देर तक करे:

अगर आप इस प्राणायाम की शुरुआत कर रहे है तो आप इसे दो से तीन मिनट तक इस प्राणायाम को कर सकते हैं औरशुरुआत में आप इसे धीरे धीरे और बीच बीच पर रुक रुक के कर सकते हैं। समय बीतने पर इसे आप  5 मिनट तक करें इसके बाद धीरे-धीरे आप इसे 10 से 20 मिनट तक कर सकते हैं।  इसके बाद धीरे धीरे आप अपने सांसों को देर तक भीतर रखने की कोशिश करें।  


उज्जायी प्राणायाम करने में सावधानी (Caution while doing Ujjayi Pranayama in Hindi):

वैसे उज्जायी प्राणायाम एक ऐसा प्राणायाम है,जिसे हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है,परंतु इस प्राणायाम को करने के लिए कुछ खास व्यक्तियो को मनाही है। जैसे की
  • उज्जयी प्राणायाम उन व्यक्तियो को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए जिनका थाइरोइड बहुत अधिक बढ़ा हुआ हो। ऐसे व्यक्ति को बिना किसी योग एक्सपर्ट के इस प्राणायाम की प्रैक्टिस नही करनी चाहिए।
  • निम्न रक्तचाप यानी लो ब्लड प्रेसर के मरीज को इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए,या फिर किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों को यह प्राणायाम बिना सांस रोके करना चाहिए या फिर किसी विशेषज्ञ के देखरेख में करना चाहिए।

निष्कर्ष:

इस लेख में मैने उज्जायी प्राणायाम के फायदे, नुकसान, उज्जायी प्राणायाम कैसे करे आदि के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की है,परंतु अगर फिर भी अगर आपके मन में कोई भी प्रश्न को लेकर संसय है तो आप निश्चिंत ही कॉमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं मैं आपके प्रश्नों के उत्तर देने की पूरी कोशिश करूंगी धन्यवाद!

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। हरे कृष्णा हेल्थ केयर एंड फिटनेस इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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